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Friday, March 1, 2024

जोरको के फाउंड आनंद नाहर शार्क टैंक इंडिया

 जोरको के फाउंड आनंद नाहर शार्क टैंक इंडिया के एक एपिसोड में आये थे. उन्होंने वह पैर बहुत सारी बातें की, अपने बिज़नेस की बात, अपने carrier की बात, सालाना सेल की बात, और एक इंटरव्यू में उन्होंने यहाँ तक कहा ही जोरको इंडिया की पहली कंपनी होगी जो लिस्ट होगी शेयर मार्किट में. 

तो आइये जानते है कुछ खास, किसी एक ऐसी बात पे जो उन्होंने शार्क टैंक इंडिया में कही थी।  हम ये आप पर छोड़ते है की इसके लिए आपका क्या राय है।  अब ये तो जरूरी नहीं की एक जैसे राय सबकी हो, और ये भी कोई जरूरी नहीं की आपकी या मेरी राय सही ही हो, हो सकता है की आपकी राय मुझसे अलग हो. 



मै बस ये समझने की कोशिश कर रहा हु की कितने हद ये बात सही है एक बिजनेसमैन के लिए और एक साधारण इंसान क लिए. 

तो चलिए बात शुरू करते है समझते है की क्या यह सही है ?

तो उन्होंने अपने बात में एक बात कही थी की कोविद १९ में जब वो इस बिज़नेस के बारे में सोच रहे थे और जब उन्होंने जगह देखनी शुरू की को उनको विज़न वाली बात कही, लेकिन मेरा जो पॉइंट है वो ये है " उन्होंने कह बनिया हु, दिमाग भी बनिए वाला ही है।  



उन्होंने कहा की जब वो जगह देख रहे थे वो उन्होंने एक फर्नीचर वाला जगह मिले, जो अच्छा खासा लोकेशन में था और लगभग, ५०० स्क्वायर का एरिया भी था.  अब यहाँ पर जब उन्होंने उस जगह के लिए बात की तो जिसका फर्नीचर थे उसने इन्हे ४५०००० में वो बेच दिया. 

Mr. . नाहर ने बताया की उसकी कॉस्टिंग ही २० लाख की थी. 

तो अब मैं ये जानना चाहता हु की ये कितना सही है।  कोई अपनी २० लाख की चीज ४५०००० में क्यों देगा, ? कुछ तो मजबूरी रही होगी उसकी. १६५०००० का नुकसान कोई ऐसे ही क्यों ले लेगा. ?

और Mr. नाहर ने उस इंसान को क्या मजबूर किया हो इतने काम में देने क लिए ? या उन्होंने उसकी मजबूरी का फायदा उठाया ?

आप क्या कहेंगे इसे बिज़नेस और मजबूरी का फायदा उठाना. ?

और अभी just कंपनी की वेबसाइट की ये हालत है ! 



Tuesday, February 27, 2024

durReey.com - आइये और भी जानकारी प्राप्त करें इसके बारे में

durReey.com  - ये एक ऐसी वेबसाइट है , जहा आप, blogging के जरिये knowledge , पोलिटिकल न्यूज़, स्पोर्ट्स न्यूज़, प्रोडक्ट्स Review और भी बहुत सारी चीजों के बारे में जान सकते है।  

आया पर आपको मोटिवेशनल चीजें पढ़ने मिलेंगी. आपके बिज़नेस और पढाई के बारे में बहुत साड़ी चीजों की जानकारी मिलेगी. 

यहाँ पर आप jokes भी देख सकते है।  इस वेबसाइट पर आप मोदी सरकार द्वारा चलाये जा रहे प्रेस रिलीज़ की जानकारी ले सकते है. और भी जितने भी प्रेस रिलीज़ होते है इंडिया में उन सब के बारे में जानकारी ले सकते है. फिर वो चले स्पोर्ट, का हो या कोई political प्रेस रिलीज़ या कोई बिज़नेस प्रेस रिलीज़। एक ही जगह पर आप सब कुछ प् सकते है. 

विशेषता : 

शॉपिंग करना हुआ आसान, यहाँ पैर आपको ऑनलाइन शॉपिंग करना भी आसानी से हो जायेगा. 

ऑनलाइन शॉपिंग वैसे तो बहुत सारे लोग और कम्पनीज offer देती है , लेकिन यहां पैर कुछ खास है 

और वो खास क्या है ? 



वो यह है की यहाँ पर आपको २० % तक का lifetime डिस्काउंट मिलेगा, आप जितनी बार भी आर्डर करोगे हर बार.  अब जैसे की आप दिन में २ बार कुछ खरीद रहे है या फिर १० बार, हर बार आपको २० % लाइफटाइम डिस्काउंट मिलेगा। 

ये सुविधा आप कैसे ले ?

इसके लिए आपको बस हमारे सोशल मीडिया एकाउंट्स को फॉलो करना, है , या तो आप follower है या तो आप सब्सक्राइबर , इन दोनों में से आप जो भी है , आपको ये सुविधा मिल जाएगी, जहां आप २० % लाइफटाइम डिस्काउंट प्राप्त कर सकते है. 



इसके बाद जैसे ही आप अपना पहला प्रीपेड आर्डर करेंगे आपको २०% लाइफटाइम डिस्काउंट का कन्फर्मेशन मिल जाएगा , अब आप आसानी से अच्छी चीजें सस्ते दाम पैर खरीद सकते है. 

यहाँ पर हम एक ही प्रोडक्ट को अलग अलग नाम से नहीं बेचते है , हम एक प्रोडक्ट को एक ही नाम से बेचते है।  धीरे धीरे हम बड़े ब्रांड्स के साथ भी टाई करेंगे, जिससे की कस्टमर, को ज्यादा प्रॉब्लम ना हो.

आइये और भी जानकारी प्राप्त करें इसके बारे में। 

Saturday, February 24, 2024

कहानी राधिका गुप्ता की - Women with Broken Nose

                                              कहानी राधिका गुप्ता की : आखों में जिनके सितारा हो सफलता का 

तो राधिका गुप्ता को आज की तारीख में हम सब जानते ही है. लेकिन अगर आप नहीं भी जानते है तो आशा करता हु अगले कुछ मिनटों में आप इंडिया की बहुत ही चर्चित और नामित पर्सनालिटी के बारे में जान जायेंगे. ज्यादा जानकारी के लिए वेबसाइट पर जाए ( durReey )

अगर अभी जिस वजह से चर्चा में है वो है उनका शार्क टैंक के सीजन ३ में आना है.

जैसा की हम सब जानते है की शार्क टैंक सीजन ३ का प्रसारण टीवी पर चालू है. 



जन्म और बचपन  : 

तो basically उनका जन्म १९८३ में एक ऐसे परिवार में हुआ जहाँ उनके पिता एक सरकारी अफसर थे. काम काज की वजह से उनका अक्सर तबादला होता रहता था. 

बचपन से ही बहुत ही होनहार स्टूडेंट थी राधिका गुप्ता. अपने आप को वो हमेशा एक गॉड गिफ्टेड टैलेंट मानती है. उनको ऐसा लगता है की उन्होंने जो भी किया सब उम्मीद से ज्यादा अच्छा हुआ. जैसे की स्कूल की पढाई ख़तम होने के बाद उन्हें आउट ऑफ़ इंडिया जाना था लेकिन उनके अंदर वो कॉन्फिडेंस नहीं आ रहा था।  तब जब उनके नजदीकी अंकल ने उनको बोला की राधिका को जाना चाहिए फिर उन्होंने उस यूनिवर्सिटी का फॉर्म भरा और खुशकिस्मत से वहां उनका enroll हो गया. और फिर वह जाकर उन्होंने पढाई पूरी की.

प्रोफेशनल कर्रिएर की शुरुवात :

सात बार रिजेक्ट हुए वो पढाई पूरी होने के बाद जब उन्होंने जॉब देखना चालू किया तब. एक समय ऐसा आया की उन्होंने sucide की भी सोच ली थी. अपने कॅरिअर के शुरुवात में उन्होंने एक बिज़नेस एनालिस्ट की। 

कुछ समय वहां काम करने के बाद उन्होंने AQR नाम की कंपनी में पोर्टफोलियो मैनेजर की नौकरी की. आनेवाले कुछ सालो में राधिका गुप्ता ने अपने पति के साथ मिलकर एक कैपिटल मैनेजमेंट स्टार्ट उप की शुरुवात की. इस कंपनी को उन्होंने २५ लाख से २०० करोड़ तक का सफर पहुंचाया. 

यहाँ से उनके स्टार्ट उप कर्रिएर का आगाज हुआ. इसके बाद जिंदगी ने उन्हें कभी पीछे मुड़ने का मौका नहीं दिया। 

२००९ से शुरुवात करने क बाद २०१४ में उन्होंने वो कंपनी edelwise Mutual फण्ड को बेच दी. और कुछ समय मैनेजमेंट edelwise Mutual फण्ड को हेड करने के बाद उन्हें मात्र ३३ की उम्र में CEO बनाया गया. अपने इस पड़ाव को भी वो गॉड गिफ्ट ही मानती है.. 





सीईओ सिर्फ ३३ की उम्र में :

CEO - उनका मानना है की जब तक हम कोई बड़ी पोजीशन में नहीं होते है हमको ऐसा लगता है की जितने भी मैनेजमेंट लेवल के लोग होते है वो एक सुपरमैन या फिर superwomen होते है , लेकिन ऐसा बिलकुल नहीं होता है. राधिका यह भी मानती है की शुरुवाती दिनों में उनको बहुत कॉन्फिडेंस नहीं था खुद के ऊपर. 



वो बताती है एक बार तो उन्हें इतना डर लगा की हो मीटिंग ही नहीं attend किये, और बिना बताये वापस चले गए. 
लेकिन धीरे धीरे उन्होंने ये सब चीजें क्या और कैसे करनी है उसपे काम किया, वो ये समझती है की जब भी हम अपनी कोई प्रॉब्लम अपने टीममेट्स से बात करते है तो हमारे साथ काम करनेवाले जरूर हमारी मदद मरते है. फिर वो प्रॉब्लम चाहे कैसी भी हो. 

उन्होंने बताया की ऑफिस में ३०० से भी ज्यादा लोगो को जब कोई ऐसी बात बतानी होती है जिससे किसी को तकलीफ हो या फिर किसी डिपार्टमेंट को ही बंद करना है तो वो नहीं कर पाती थी।  लेकिन अब उन्होंने समझ लिया ता की ये चीजें उनको कैसे करन्हि है।  अपने teammates को ये सब बातें discuss करने के बाद बहुत ही आसान तरीके से वो ये चीजें कर पाते थे. 

राधिका बताते है की जब उन्होंने इसकी शुरुवात की थी तब edelwise म्यूच्यूअल फण्ड भारत में बहुत ही निचे पायदान पर था. आउट ऑफ़ ४० , ३६ नंबर ये फण्ड आता था। और अब उसमे बहुत इम्प्रोवेमेन्ट्स हुए है।  ५००० करोड़ से लेकर आज वो 1.२ लाख करोड़ का बिज़नेस कर रहे है. 

परिवारिक जीवन : 

एक sucessfull बिज़नेस वीमेन के साथ साथ वो एक माँ भी है।  उनका मानना है ये जरूरी नहीं ही एक औरत का carrier, माँ बनने के बाद ख़तम हो जाता है, वो एब बखूबी जानती है यही थोड़ा priorities जरूर शिफ्ट होती है लेकिन एक समय के बाद सब सही हो जाता है और एक औरत अपना बिज़नेस और घर बहुत ही आसानी से चला सकती है।  उनके पति का नाम :नलिन मोनीज़ है 

पहली बार उन्हें शार्क टैंक में आने का मौका मिला है, जिसके लिए वो बहुत खुश है ,  और होना भी चाहिए क्योंकी वो खुद एक बिज़नेस से है।  

सीख : उनके अंदर हमेशा से ही एक सपने को पूरा करने की चाहत रहती है , और हमेशा एक सपने को पूरा करने के बाद एक दूसरा सपना देखना उनको सही लगता है. 

अवार्ड :  

राधिका गुप्ता के योगदान ने उन्हें के अवार्ड्स भी दिलाये है. जिनमे से कुछ निचे दिए गए है :

४० अंडर ४० बिज़नेस अवार्ड - २०२१ 
बिज़नेस टुडे सबसे शक्तिशाली वूमेन बिज़नेस  - २०१९ 
फार्च्यून इंडिया की सबसे शक्तिशाली  अंडर ५० - २०२० 
young ग्लोबल अवार्ड - २०२२ 

Dated : २४ Feb २०२४ 

Tuesday, February 20, 2024

..ऑफिस में चाय पिलानेवाले ने कैसे बनायीं २ करोड़ की कंपनी ?

..ऑफिस में चाय पिलानेवाले ने कैसे बनायीं २ करोड़ की कंपनी ? Doographics 

ज्यादा जानकारी के लिए हमारे वेबसाइट www.durReey.com पर Visit करें 

इनफ़ोसिस में ९००० क पगार पाने से लेकर भारत की पहली डिज़ाइन कंपनी - बीड जिले महाराष्ट्रा का रहनेवाला दादासाहेब भगत। ...... इनके माता पिता गन्ने काटनेवाले लोग थे. जो रोजी रोटी के लिए ये काम करते है. जिससे वो अपन दिन का खर्चे पुरे कर पाते थे. 

बचपन में दादासाहेब भी उनके साथ गन्ना काटने जाया करते थे. ...ऐसा भी परिश्थिति आयी थी की उनकी माँ जब ६-७ महीने की प्रेग्नेंट थी फिर भी तो गन्ने को काट कर सही जगह ले जाया करती थी. 

३०० / ४०० रुपये की माँ के पैरो की बिछिया बेचनी पड़ी - वो एक बहुत हही बुरा दिन था, 

जब उनके माता पिता खेती करने जाते तो ये अपने दादाजी के साथ स्कूल जाया करते. कभी स्कूल में सो जाते थे ..और वहां पहली बार उन्होंने एक पेंटर को डिज़ाइन करते देखा. ,,,,उनसे ही डिज़ाइन सीखी। छोटे मोठे काम करते करते दादासाहेब भगत ने अपना १० की पढाई पूरी की. 

जब कभी खाने के लिए कुछ नहीं मिलता तो आलू और पानी से भी कई दिन निकले है।  

जैसे तैसे उन्होंने अपनी आईटीआई कम्पलीट की. जब उन्हें पुणे जाने था और उसके लिए उन्हें पैसे चाहिए थे ३००-४०० रूपये। ..... यही तो समय है जब उनकी माँ ने पैरो की बिछिया बेच दी. क्युकी बेटे को जॉब मिलने की उम्मीद जगी थी. 

शुरुवाती दिनों में ४००० पगार मिलते थे, लेकिन हमेशा दादासाहेब सोचते थे की उनकी पगार भी ७०००-९००० होनी चाइये ताकि सब सही से चल सके. 

आख़िरकार उन्हें एक ऑफर आया और उसमे उन्हें ९००० की पगार मिलेगी लेकिन शर्त यह थी की काम वो ऑफिस बॉय का था, उसमे उनको ऑफिस के सारे काम करने पड़ेंगे, जैसे की साफ़ सफाई , चाय पिलाना, बाथरूम साफ रखें। ...etc 

शर्म के मारे उन्होंने अपने पहचान वालो को कभी नहीं बताया की वो पोछा करते है ऑफिस में. 

लेकिन जब वो रोज दूसरे लोगो को गाडी में आते देखते थे तो वो सोचने लगे कि मैं ऐसा क्या करू की पैसे कमाने के लिए.  

फिर अगले १ से २ साल तक नाईट में जॉब करके वो कॉलेज में डिज़ाइन सी प्रोग्रामिंग करने लगे. फिर उन्होंने में रिलायंस में काम किया। वह से बहुत सारी चीजे सीखी। .हैदराबाद में जाने के बाद उन्होंने १९९९ में एक इंस्टीटुए में C + सीखा. 

गूगल इमेज. 

अब थोड़े थोड़े काम करके उनकी फाइनेंसियल कंडीशन ठीक होने लगी थी.,कुछ पैसा बचा लेने के बाद उन्होंने एक सेकंड हैंड बाइक लेली. दिखावे के चक्कर में एक गाडी ने थोक दिया और फिर घर बैठना पड़ा. एक दोस्त से लैपटॉप लेकर बहुत सारी ऑनलाइन पोर्टफोलियो बनाये। ... 

अगले कुछ महीने में उनकी मंथली इनकम सैलरी से भी ज्यादा होने लगी. इस बात का एहसास होने क बाद उन्होंने जॉब छोड़ दिया और फुल टाइम बिज़नेस करने लगे.

अचानक lockdown लगने क बाद गांव के बच्चो के साथ मिलकर उन्होंने काम करना चालू किया...और इतना अच्छा चला की ३००००० से भी ज्यादा users आ गए उनके प्लेटफार्म पे.  

उसके बाद उन्होंने डिज़ाइन के मार्किटप्लेस बनाये और आज १००००० से भी ज्यादा customer है,. और revenue लाखों और करोडो में है. 

पिछले साल २ करोड़ और आनेवाले साल ने १० करोड़ की उम्मीद कर रहे है. 

जिस माँ ने अपने पैरो की बिछिया तक बेच दी थी आज उस माँ को बहुत सारे गहने दिए है दादासाहेब ने 

..ऑफिस में चाय पिलानेवाले ने कैसे बनायीं २ करोड़ की कंपनी ? 

Monday, February 19, 2024

कहानी PAYTM की ...

कहानी PAYTM की। ...

durReey की वेबसाइट पर जाए,  ..ज्यादा जानकारी के लिए 

 जो हमारे साथ नहीं वो रोयेंगे ऐसा कहा था PAYTM  के फाउंडर विजय शेखर शर्मा २०१७ में। ...शायद उनको ये अंदाजा भी नहीं होगा की आनेवाले वक़्त में कुछ भी हो सकता है और अभी फिलहाल ये है की उनके shareholder आज उनके साथ रह कर भी रो रहे है,........और जैसा की मैंने अभी कहा की भविष्य में कब क्या होगा कैसे होगा किसी को नहीं पता। ...तो उम्मीद यही करेंगे की PAYTM जल्दी जल्दी अपनी तक;लीफ कम करे और अपने शेयर धारको को उनकी मेहनत की कमाए हुआ पैसो का सही दाम दे सके. 

फिछले कुछ दिनों में इस कंपनी में भयंकर downfall दिखा है. वही ऊपर कही हुए बात को लगभग ७ साल हो गए है. ३० January को इसका प्राइस ७६० रुपये था और अब ३२८ रुपये पर ट्रेड कर रहा है. 

PAYTM पहले सिर्फ एक मोबाइल रिचार्ज कंपनी हुआ करती थी। .ये बात है २००७ की, धीरे धीरे और भी बिल पेमेंट सुविधाएं ऐड कर दिया payment ने.

PAYTM का कस्टमर ग्रोथ ८ नवंबर २०१६ से अगले ९० दिनों में बहुत ज्यादा हो गया...वो इसलिए क्युकी तभी प्रधानमंत्री मोदी ने नोटेबंदी की थि. जिसका भरपूर फायदा उठाया PAYTM ने... कुछ लोगो का कहना था की प्रधानमंत्री मोदीजी ने जो यह कदम उठाया उसके बारे में शर्मा को पहले ही पता था। ..और इसलिए दूसरे दिन अखबारों में १ पेज में मोदीजी को PAYTM ने थैंक योय कहा. 

२०१४ में कंपनी में अपना वॉलेट ऐड किया था और २०१५ तक वो सिर्फ इलेक्ट्रिसिटी और वाटरबिल भरने की व्यवस्था थी. 

१०००० से भी ज्यादा एजेंट्स को hire किया था PAYTM ने जो उनको qrcode लोगो तक पहुंचाते। 

अच्छा PAYTM का jackmaa से भी अच्छा रिश्ता था। ...चीन के इन्वेस्टमेंट होने के कारण शर्मा को मजबूरन stake काम करना पड़ा. 

 हमेशा से ही PAYTM अपने आप को एक देशभक्ति वाला फील कराती है अपने ग्राहकों को, लेकिन आज भी चीन से फंडेड है., 

PAYTM के ऊपर डाटा चुराने और डाटा से छेड़छाड़ करने का भी आरोप लगा था, 

२०१८ से ही आर बी आई ने वार्निंग दिया था क्युकी वो गवर्नमेंट के रूल्स & रेगुलेशन को फॉलो नहीं कर रहे थे, KYC घोटाला भी सामने आया जाया एक ही पैन कार्ड पे  बहुत सारे अकाउंट बने हुए था और उनमे से जायदातर अकाउंट उपयोग में ही नहीं थे, २०२१ में पेटम को फिर से झटका लगा और १ करोड़ का फाइन और फिर २०२३ में ५ करोड़ का फाइन.....इतनी बार वार्निंग देने के बाद भी जब पेटम ने अपनी ग़लतियो से सबक नहीं लिया तो फिर आर बी आई के पास और कोई चारा नहीं बचा।  और फाइनली जौनरी में अंत में आर बी आई ने २९ फ़रवरी तक के लिए रोक लगा दी.

गूगल इमेज 
फाउंडर & सी ई ओ 


एक जानकारी के अनुसार लाखो कस्टमर के अकाउंट खुले और वो भी बिना KYC कराये. 

PAYTM हमेशा से ही अपने आप को देशभक्ति और देश की सेवा करनेवालों में से दिखती है. अपने लास्ट मेसैज में भी शर्मा ने यही करने की कोशिश की थी. आगे भी कोई न कोई तरीका ढूंढ ही लय जायेगा।

हो सकता है की कोई बड़ी कंपनी PAYTM  को सहारा दे दे। .." .सहारा याद है आपको या फिर भूल गए, सुब्रतो राय "

अब देखते है कैसे और किसके सहारे PAYTM  अपना कामकाज आगे बढाती है। ..... ...durReey 


आभा क्या है ?

आभा क्या है ? 

आभा १४ नंबर का एक अकाउंट है जो की यूनिक है और इंडियन हेल्थ इकोसिस्टम में पार्टिसिपेट करने का जरिया है.

आभा अकाउंट नंबर एक मजबूत और भरोषा दिलानेवाला अकाउंट नंबर है जो की आप भारत के किसी भी कोने में इसका उपयोग कर सकते है. आभा मतलब " आयुषस्यमान भारत हेल्थ अकाउंट" जो आपको डिजिटली एक्सेस देता है भारत में कही भी उपयोग करने के लिए. 

आप इसको डिजिटली यूज़ कर सकते हो और अपने रिकार्ड्स तो देख सकते है. आपको आपका ये डाटा शेयरिंग चालू करने है के लिए A b d m आभा एड्रेस लिंक को आभा अकाउंट नंबर से लिंक करना पड़ेगा. 

कौन कौन आभा अकाउंट ले सकता है ?

आभा अकाउंट होल्डर होने के लिए आपको भारत का नागरिक होना ही सब कुछ समझा जायेगा. 

डाक्यूमेंट्स क्या क्या लगते है ?

आभा एक ऑनलाइन अकाउंट ओपनिंग प्रोसेस है, जसका मतलब यह है की आभा अकाउंट ओपन करने क लिए अस्प्को कोई हार्ड कॉपी नहीं देनी है।  सारा का सारा प्रोसेस ऑनलाइन ही है।  आपको आपका आधार कार्ड, पैन कार्ड, और ड्राइविंग लाइसेंस का उपयोग करना पड़ेगा, जो आपके मोबाइल नंबर से लिंक हो. 

आभा को basically ऐसे बनाया गया है ताकि आप सारे healthcare सिस्टम का कही से भी एक्सेस प् सके, आप आसानी से अपना आभा id क्रीट कर सकते है और pdf में डाउनलोड कर सकते है.

ध्यान रहे की ये कार्ड आपकी जगह कोई और गलत इस्तेमाल नहीं कर सकता, इन सब बातों में आपकी इजाजत लगती है. 



Tuesday, February 6, 2024

सरयू तट पर बैठकी लगी है।

        अंगद, सुग्रीव, नल, नील, जामवंत के साथ विभीषण और निषादराज आपस में बातचीत कर रहे हैं। सभी लोग हनुमान जी के अतिथि हैं, पिछले पांच सौ बरस से वे अयोध्या जब भी आते हैं हनुमान जी के यहाँ ही रुकते हैं।

रामकथा कहते सुनते आज का दिन बीता है, सांझ होने को आई, अयोध्या की सुन्दरता, लोगों में भगवतभक्ति देखकर सभी के मन आह्लादित हैं, तभी हनुमानगढ़ी से बजरंगी आते दिखे, एक हाथ में दोना लिए दूसरे हाथ को पेट पर सहलाते चले आ रहे हैं।

हनुमान जी कितने भागवान हैं जो इनके लिए अपने निकट घर बनवा दिया था भगवान ने, नल बोले।

वह तो है, देखो दोने में क्या ला रहे हैं महावीर? आजकल तो रोज नया नया व्यंजन खाने को मिल रहा है, अंगद का ध्यान खाने पर था।

सुगंध तो बड़ी अच्छी आ रही है, कल हलवा लाये थे, उससे पहले जाने क्या लाये थे जिसमें तीन कान बने हुए थे, सुग्रीव नाक ऊँची करते हुए बोले।

उसे समोसा कहते हैं, वानरराज, मुझे यह व्यंजन बहुत पसंद आया था, मैंने बजरंगी से बाद में और मंगा कर खाया था, आज लगता है कुछ मीठी वस्तु ला रहे हैं आंजनेय, विभीषण ने कहा।

हनुमान जी ने पास आकर दोना चट्टान पर रख दिया, सफ़ेद सी गाढ़ी मलाई जैसी कोई वस्तु थी।

युवराज जी इसे पहले आप चखिए, आज कोई भक्त चढ़ा गया था। मुझे यह पसंद आया तो आप लोगों के लिए ले आया, बजरंगी बैठते हुए बोले।

यह तो बहुत स्वादिष्ट है, क्या नाम है इसका?
अंगद ने मिष्ठान्न का स्वाद लिया और फिर सभी में बांटने लगे।

इसका नाम कलाकंद है युवराज, यह मिष्ठान्न भगवान विश्वनाथ को भी बहुत प्रिय है, तभी रुद्रावतार को भी यह पसंद आया, निषादराज गुह कलाकंद खाते हुए बोले।

कुछ भी कहो जब से बजरंगी के यहाँ आये हैं तब से आनंद ही आनंद हो रहा है। भगवान का इतना भव्य महल बनकर तैयार हो गया, आज भगवान उसमें विराज गये, हमारी प्रतीक्षा पूर्ण हो गई, जामवंत आनंदित होकर बोले।

आज प्रभु का दर्शन हो गया, सोचकर आंसू भर आते हैं, त्रेता में एक मेरा भाई ही दुष्ट था पर इस कलयुग में कितने दुष्ट थे लेकिन प्रभु ने मर्यादा नहीं त्यागी, चाहते तो सबको भृकुटी विलास मात्र से सीधा कर देते या हममें से किसी को भी आज्ञा दे देते, पर उन्होंने इस काज हेतु नरों में एक श्रेष्ठ नर को चुना और उसकी सहायता के लिए भोलेनाथ का एक आदित्य नामक गण भेज दिया और आज के विधि विधान से ही अपने महल में विराजे, विभीषण पुनः बोले।

हनुमान जी सारा रहस्य जानते हैं, कलाकंद खाते हुए मुस्कुराते रहे, फिर बोले, राम जी की माया वही जानें, हम तो सेवक हैं लंकापति जी, चलो देखो देवता लोग भी आ गये हैं, अब भेस बदलो, सरयू मइया की आरती का समय हो गया है।

सब लोगों ने कलाकंद ख़त्म किया और भेस बदलकर आरती में शामिल होने चले गये।

आइये आज जानकारी लेते है Boat के एक प्रोडक्ट वेव फ्लेक्स कनेक्ट के बारे में।

                     आइये आज जानकारी लेते है Boat के एक प्रोडक्ट  वेव फ्लेक्स कनेक्ट के बारे में।  स्मार्टवॉच में १० दिन तक की बैटरी  कालिंग...