कहानी राधिका गुप्ता की : आखों में जिनके सितारा हो सफलता का
तो राधिका गुप्ता को आज की तारीख में हम सब जानते ही है. लेकिन अगर आप नहीं भी जानते है तो आशा करता हु अगले कुछ मिनटों में आप इंडिया की बहुत ही चर्चित और नामित पर्सनालिटी के बारे में जान जायेंगे. ज्यादा जानकारी के लिए वेबसाइट पर जाए ( durReey )
अगर अभी जिस वजह से चर्चा में है वो है उनका शार्क टैंक के सीजन ३ में आना है.
जैसा की हम सब जानते है की शार्क टैंक सीजन ३ का प्रसारण टीवी पर चालू है.
जन्म और बचपन :
तो basically उनका जन्म १९८३ में एक ऐसे परिवार में हुआ जहाँ उनके पिता एक सरकारी अफसर थे. काम काज की वजह से उनका अक्सर तबादला होता रहता था.
बचपन से ही बहुत ही होनहार स्टूडेंट थी राधिका गुप्ता. अपने आप को वो हमेशा एक गॉड गिफ्टेड टैलेंट मानती है. उनको ऐसा लगता है की उन्होंने जो भी किया सब उम्मीद से ज्यादा अच्छा हुआ. जैसे की स्कूल की पढाई ख़तम होने के बाद उन्हें आउट ऑफ़ इंडिया जाना था लेकिन उनके अंदर वो कॉन्फिडेंस नहीं आ रहा था। तब जब उनके नजदीकी अंकल ने उनको बोला की राधिका को जाना चाहिए फिर उन्होंने उस यूनिवर्सिटी का फॉर्म भरा और खुशकिस्मत से वहां उनका enroll हो गया. और फिर वह जाकर उन्होंने पढाई पूरी की.
प्रोफेशनल कर्रिएर की शुरुवात :
सात बार रिजेक्ट हुए वो पढाई पूरी होने के बाद जब उन्होंने जॉब देखना चालू किया तब. एक समय ऐसा आया की उन्होंने sucide की भी सोच ली थी. अपने कॅरिअर के शुरुवात में उन्होंने एक बिज़नेस एनालिस्ट की।
कुछ समय वहां काम करने के बाद उन्होंने AQR नाम की कंपनी में पोर्टफोलियो मैनेजर की नौकरी की. आनेवाले कुछ सालो में राधिका गुप्ता ने अपने पति के साथ मिलकर एक कैपिटल मैनेजमेंट स्टार्ट उप की शुरुवात की. इस कंपनी को उन्होंने २५ लाख से २०० करोड़ तक का सफर पहुंचाया.
यहाँ से उनके स्टार्ट उप कर्रिएर का आगाज हुआ. इसके बाद जिंदगी ने उन्हें कभी पीछे मुड़ने का मौका नहीं दिया।
२००९ से शुरुवात करने क बाद २०१४ में उन्होंने वो कंपनी edelwise Mutual फण्ड को बेच दी. और कुछ समय मैनेजमेंट edelwise Mutual फण्ड को हेड करने के बाद उन्हें मात्र ३३ की उम्र में CEO बनाया गया. अपने इस पड़ाव को भी वो गॉड गिफ्ट ही मानती है..
सीईओ सिर्फ ३३ की उम्र में :
CEO - उनका मानना है की जब तक हम कोई बड़ी पोजीशन में नहीं होते है हमको ऐसा लगता है की जितने भी मैनेजमेंट लेवल के लोग होते है वो एक सुपरमैन या फिर superwomen होते है , लेकिन ऐसा बिलकुल नहीं होता है. राधिका यह भी मानती है की शुरुवाती दिनों में उनको बहुत कॉन्फिडेंस नहीं था खुद के ऊपर.
वो बताती है एक बार तो उन्हें इतना डर लगा की हो मीटिंग ही नहीं attend किये, और बिना बताये वापस चले गए.
लेकिन धीरे धीरे उन्होंने ये सब चीजें क्या और कैसे करनी है उसपे काम किया, वो ये समझती है की जब भी हम अपनी कोई प्रॉब्लम अपने टीममेट्स से बात करते है तो हमारे साथ काम करनेवाले जरूर हमारी मदद मरते है. फिर वो प्रॉब्लम चाहे कैसी भी हो.
उन्होंने बताया की ऑफिस में ३०० से भी ज्यादा लोगो को जब कोई ऐसी बात बतानी होती है जिससे किसी को तकलीफ हो या फिर किसी डिपार्टमेंट को ही बंद करना है तो वो नहीं कर पाती थी। लेकिन अब उन्होंने समझ लिया ता की ये चीजें उनको कैसे करन्हि है। अपने teammates को ये सब बातें discuss करने के बाद बहुत ही आसान तरीके से वो ये चीजें कर पाते थे.
राधिका बताते है की जब उन्होंने इसकी शुरुवात की थी तब edelwise म्यूच्यूअल फण्ड भारत में बहुत ही निचे पायदान पर था. आउट ऑफ़ ४० , ३६ नंबर ये फण्ड आता था। और अब उसमे बहुत इम्प्रोवेमेन्ट्स हुए है। ५००० करोड़ से लेकर आज वो 1.२ लाख करोड़ का बिज़नेस कर रहे है.
परिवारिक जीवन :
एक sucessfull बिज़नेस वीमेन के साथ साथ वो एक माँ भी है। उनका मानना है ये जरूरी नहीं ही एक औरत का carrier, माँ बनने के बाद ख़तम हो जाता है, वो एब बखूबी जानती है यही थोड़ा priorities जरूर शिफ्ट होती है लेकिन एक समय के बाद सब सही हो जाता है और एक औरत अपना बिज़नेस और घर बहुत ही आसानी से चला सकती है। उनके पति का नाम :नलिन मोनीज़ है
पहली बार उन्हें शार्क टैंक में आने का मौका मिला है, जिसके लिए वो बहुत खुश है , और होना भी चाहिए क्योंकी वो खुद एक बिज़नेस से है।
सीख : उनके अंदर हमेशा से ही एक सपने को पूरा करने की चाहत रहती है , और हमेशा एक सपने को पूरा करने के बाद एक दूसरा सपना देखना उनको सही लगता है.
अवार्ड :
राधिका गुप्ता के योगदान ने उन्हें के अवार्ड्स भी दिलाये है. जिनमे से कुछ निचे दिए गए है :
४० अंडर ४० बिज़नेस अवार्ड - २०२१
बिज़नेस टुडे सबसे शक्तिशाली वूमेन बिज़नेस - २०१९
फार्च्यून इंडिया की सबसे शक्तिशाली अंडर ५० - २०२०
young ग्लोबल अवार्ड - २०२२
Dated : २४ Feb २०२४