जोरको के फाउंड आनंद नाहर शार्क टैंक इंडिया के एक एपिसोड में आये थे. उन्होंने वह पैर बहुत सारी बातें की, अपने बिज़नेस की बात, अपने carrier की बात, सालाना सेल की बात, और एक इंटरव्यू में उन्होंने यहाँ तक कहा ही जोरको इंडिया की पहली कंपनी होगी जो लिस्ट होगी शेयर मार्किट में.
तो आइये जानते है कुछ खास, किसी एक ऐसी बात पे जो उन्होंने शार्क टैंक इंडिया में कही थी। हम ये आप पर छोड़ते है की इसके लिए आपका क्या राय है। अब ये तो जरूरी नहीं की एक जैसे राय सबकी हो, और ये भी कोई जरूरी नहीं की आपकी या मेरी राय सही ही हो, हो सकता है की आपकी राय मुझसे अलग हो.
मै बस ये समझने की कोशिश कर रहा हु की कितने हद ये बात सही है एक बिजनेसमैन के लिए और एक साधारण इंसान क लिए.
तो चलिए बात शुरू करते है समझते है की क्या यह सही है ?
तो उन्होंने अपने बात में एक बात कही थी की कोविद १९ में जब वो इस बिज़नेस के बारे में सोच रहे थे और जब उन्होंने जगह देखनी शुरू की को उनको विज़न वाली बात कही, लेकिन मेरा जो पॉइंट है वो ये है " उन्होंने कह बनिया हु, दिमाग भी बनिए वाला ही है।
उन्होंने कहा की जब वो जगह देख रहे थे वो उन्होंने एक फर्नीचर वाला जगह मिले, जो अच्छा खासा लोकेशन में था और लगभग, ५०० स्क्वायर का एरिया भी था. अब यहाँ पर जब उन्होंने उस जगह के लिए बात की तो जिसका फर्नीचर थे उसने इन्हे ४५०००० में वो बेच दिया.
Mr. . नाहर ने बताया की उसकी कॉस्टिंग ही २० लाख की थी.
तो अब मैं ये जानना चाहता हु की ये कितना सही है। कोई अपनी २० लाख की चीज ४५०००० में क्यों देगा, ? कुछ तो मजबूरी रही होगी उसकी. १६५०००० का नुकसान कोई ऐसे ही क्यों ले लेगा. ?
और Mr. नाहर ने उस इंसान को क्या मजबूर किया हो इतने काम में देने क लिए ? या उन्होंने उसकी मजबूरी का फायदा उठाया ?
आप क्या कहेंगे इसे बिज़नेस और मजबूरी का फायदा उठाना. ?
और अभी just कंपनी की वेबसाइट की ये हालत है !
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