..ऑफिस में चाय पिलानेवाले ने कैसे बनायीं २ करोड़ की कंपनी ? Doographics
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इनफ़ोसिस में ९००० क पगार पाने से लेकर भारत की पहली डिज़ाइन कंपनी - बीड जिले महाराष्ट्रा का रहनेवाला दादासाहेब भगत। ...... इनके माता पिता गन्ने काटनेवाले लोग थे. जो रोजी रोटी के लिए ये काम करते है. जिससे वो अपन दिन का खर्चे पुरे कर पाते थे.
बचपन में दादासाहेब भी उनके साथ गन्ना काटने जाया करते थे. ...ऐसा भी परिश्थिति आयी थी की उनकी माँ जब ६-७ महीने की प्रेग्नेंट थी फिर भी तो गन्ने को काट कर सही जगह ले जाया करती थी.
३०० / ४०० रुपये की माँ के पैरो की बिछिया बेचनी पड़ी - वो एक बहुत हही बुरा दिन था,
जब उनके माता पिता खेती करने जाते तो ये अपने दादाजी के साथ स्कूल जाया करते. कभी स्कूल में सो जाते थे ..और वहां पहली बार उन्होंने एक पेंटर को डिज़ाइन करते देखा. ,,,,उनसे ही डिज़ाइन सीखी। छोटे मोठे काम करते करते दादासाहेब भगत ने अपना १० की पढाई पूरी की.
जब कभी खाने के लिए कुछ नहीं मिलता तो आलू और पानी से भी कई दिन निकले है।
जैसे तैसे उन्होंने अपनी आईटीआई कम्पलीट की. जब उन्हें पुणे जाने था और उसके लिए उन्हें पैसे चाहिए थे ३००-४०० रूपये। ..... यही तो समय है जब उनकी माँ ने पैरो की बिछिया बेच दी. क्युकी बेटे को जॉब मिलने की उम्मीद जगी थी.
शुरुवाती दिनों में ४००० पगार मिलते थे, लेकिन हमेशा दादासाहेब सोचते थे की उनकी पगार भी ७०००-९००० होनी चाइये ताकि सब सही से चल सके.
आख़िरकार उन्हें एक ऑफर आया और उसमे उन्हें ९००० की पगार मिलेगी लेकिन शर्त यह थी की काम वो ऑफिस बॉय का था, उसमे उनको ऑफिस के सारे काम करने पड़ेंगे, जैसे की साफ़ सफाई , चाय पिलाना, बाथरूम साफ रखें। ...etc
शर्म के मारे उन्होंने अपने पहचान वालो को कभी नहीं बताया की वो पोछा करते है ऑफिस में.
लेकिन जब वो रोज दूसरे लोगो को गाडी में आते देखते थे तो वो सोचने लगे कि मैं ऐसा क्या करू की पैसे कमाने के लिए.
फिर अगले १ से २ साल तक नाईट में जॉब करके वो कॉलेज में डिज़ाइन सी प्रोग्रामिंग करने लगे. फिर उन्होंने में रिलायंस में काम किया। वह से बहुत सारी चीजे सीखी। .हैदराबाद में जाने के बाद उन्होंने १९९९ में एक इंस्टीटुए में C + सीखा.
अब थोड़े थोड़े काम करके उनकी फाइनेंसियल कंडीशन ठीक होने लगी थी.,कुछ पैसा बचा लेने के बाद उन्होंने एक सेकंड हैंड बाइक लेली. दिखावे के चक्कर में एक गाडी ने थोक दिया और फिर घर बैठना पड़ा. एक दोस्त से लैपटॉप लेकर बहुत सारी ऑनलाइन पोर्टफोलियो बनाये। ...
अगले कुछ महीने में उनकी मंथली इनकम सैलरी से भी ज्यादा होने लगी. इस बात का एहसास होने क बाद उन्होंने जॉब छोड़ दिया और फुल टाइम बिज़नेस करने लगे.
अचानक lockdown लगने क बाद गांव के बच्चो के साथ मिलकर उन्होंने काम करना चालू किया...और इतना अच्छा चला की ३००००० से भी ज्यादा users आ गए उनके प्लेटफार्म पे.
उसके बाद उन्होंने डिज़ाइन के मार्किटप्लेस बनाये और आज १००००० से भी ज्यादा customer है,. और revenue लाखों और करोडो में है.
पिछले साल २ करोड़ और आनेवाले साल ने १० करोड़ की उम्मीद कर रहे है.
जिस माँ ने अपने पैरो की बिछिया तक बेच दी थी आज उस माँ को बहुत सारे गहने दिए है दादासाहेब ने
..ऑफिस में चाय पिलानेवाले ने कैसे बनायीं २ करोड़ की कंपनी ?
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